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भारतीय रेलवे की हरित ऊर्जा पहल
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विद्युत नॉन-ट्रैक्शन में ऊर्जा उपयोग बेहतर करने के लिए भावी पहल

ऊर्जा संरक्षण को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से भारतीय रेल ने ऊर्जा संरक्षण बेहतर बनाने के लिए कुछ पाइलट प्रोजेक्ट आरंभ किए हैं जिसका उद्देश्य आने वाले दिनों में ऐसी परियोजनाओं को कई गुना सफल बनाना है।

  • ऑप्टीमल लाइट कंट्रोल सिस्टम
    ऑप्टीमल लाइट कंट्रोल सिस्टम एक व्यापक प्रणाली है जो सभी प्रकार के लाइटिंग लोड को नियंत्रित करता है। यह पूर्णतया कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित प्रणाली है जिसमें प्रकाश स्तर में आनुपातिक कमी किए बिना अप्लाइड वोल्टेज घटा कर ऊर्जा खपत में कमी की जा सकती है।
  • स्मार्ट सेंस एवं स्मार्ट ग्रिड सिस्टम
    परियोजना का उद्देश्य बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स में विजुअलाइजेशन और ऊर्जा प्रबंधन सेवाएं प्रदान करने लिए ऊर्जा खपत, डीजल जेनरेटरों से ऊर्जा उत्पादन, कुल रनिंग घंटे, ब्लैक आउट के कुल घंटे, ब्लैकआउट फ्रीक्वेंसी आदि मॉनीटर करना है।

  • नॉन-एसी कोचों में एलईडी लाइटों का रेट्रो फिटमेंट
    मौजूदा ट्यूब लाइट फिटिंग्स में कम रोशनी,लाइटों का असमान वितरण, एक निर्धारित अवधि के बाद लाइटों का बार-बार अनुरक्षण/बदला जाना, बाहरी धूल मिट्टी से खराब दृश्यता और अधिक बिजली की खपत जैसी कुछ सीमाएं है। ट्यूब लाइट फिटिंग्स की कमियों को दूर करने के लिए, 110 वोल्ट डीसी पर ऊर्जा संरक्षित एलईडी आधारित कम रखरखाव वाली और लंबे समय तक चलने वाली ट्यूब लाइटें (2 फीट 9 वाट) परिचालन हेतु उपयुक्त हैं, जिसमें मेल/एक्सप्रेस पैसेंजर गाड़ियों के विभिन्न कोचों में लगाए जाने के लिए माउंटिंग की व्यवस्था भी है, इससे 40% तक ऊर्जा की बचत होगी।

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  • नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर स्वचालित लाइट और फैन नियंत्रण प्रणाली
    यह इंटरनेट पर सेंट्रल एससीएडीए( SCADA) से लाइट की मॉनीटरिंग और कंट्रोल के लिए लाइट फीडर खंभों के अंदर संस्थापित इंटेलीजेंट फील्ड डिवाइस आधारित जीपीआरएस से युक्त हैं।
  • पम्पिंग व्यवस्था का स्वचालन
    इस योजना से सिस्टम कार्यकुशलता/कार्य निष्पादन, उपकरणों/लोगों की सुरक्षा, और समय से रखरखाव पर ध्यान देने से डाउन टाइम में कमी को सुधारा जा सकता है। यह प्रणाली ट्यूब वेल पंप साइटों पर रिमोट टर्मिनल यूनिटों के माध्यम से काम करती है। ये आरटीयू सेंट्रल सर्वर युक्त जीपीआरएस के माध्यम से जुड़े हैं। मॉनीटरिंग और कंट्रोल के लिए सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है और यह इंटरनेट के माध्यम से वेब ब्राउज़र के द्वारा होता है। इस वेब आधारित ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेयर में रिपोर्टों, अलर्ट्स और अलार्म के विन्यास की सुविधा है।
  • अधिक(super)ऊर्जा संरक्षित पंखों की व्यवस्था (दिल्ली200, अंबाला200)
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    35 वाट के ऊर्जा संरक्षित पंखे

    एक परंपरागत सीलिंग पंखे की तुलना में अधिक ऊर्जा संरक्षित पंखों में लगभग 35 वाट की खपत होती है और परंपरागत सीलिंग पंखे की तुलना में 50% से अधिक विद्युत ऊर्जा की बचत होती है।


  • लिफ्ट के लिए अस्थिर वोल्टेज अस्थिर फ्रीक्वेंसी वाली वीवीवीएफ ड्राइव का संस्थापन
    एलिवेटर एक वीवीवीएफ ड्राइव से युक्त है,जो ड्राइविंग मोटर को नियंत्रित करने के लिए एलिवेटेड कंट्रोलर के साथ कार्यात्मक रूप से संबंद्ध है, । वीवीवीएफ आधारित तकनीक गति नियंत्रण के साथ एलिवेटर का संचालन सुनिश्चित करती है। वीवीवीएफ ड्राइव के परिणामस्वरूप आरंभिक करंट और ब्रेक लाइनर की घर्षण संबंधी टूट-फूट को कम/सीमित करने के लिए मोटर चलाने/बंद करने के दौरान गतिवर्धन/ गति को कम करना आसान होता है। वीवीवीएफ ड्राइव में सभी प्रकार की संरक्षा सहित क्लोज्ड लूप सिस्टम, एलईडी स्क्रॉलिंग डिस्प्ले सिस्टम सहित फ्लोर लेवलिंग कंट्रोल कॉल बटन, हाल बटन सहित कार ऑपरेटिंग पैनल,कम्पलीट शाफ्ट वायरिंग सहित एआरडी, अप/डाउन संकेतक और अन्य सभी संबंद्ध एसेसरीज़/उपकरण मौजूद हैं जो आईएसएसऔर आईई नियमों और आरडीएसओ विशिष्टि सं. आरडीएसओ /2013/आएम/स्पेक/0016 (रेव’ओ‘) के अनुसार मौजूदा 8 पैसेंजर, 8 स्टॉप्स और 8 ओपनिंग लिफ्ट (अधिकतम) में वीवीएफ ड्राइव सहित मौजूदा कंट्रोलर के पुनर्स्थापन के लिए अपेक्षित हैं।
  • सौर पंपों का प्रावधान
    अमृतसर रेलवे स्टेशन के निकट समपार फाटक पर ऊर्जा संरक्षित फाइव स्टार रेटेड 1.5 एचपी सौर ऊर्जायुक्त स्टेनलेस स्टील पंप लगाए गए हैं। यह सिस्टम 2 किलोवाट शक्ति की क्षमता वाले 8 सौर फोटोवोल्टेइक मॉड्यूल, 3.5 केवीए पावर कंट्रोल यूनिट, 3 घंटे का पावर बैकअप सहित 100एएच क्षमता वाला बैटरी बैंक, से युक्त है। इससे अनुमानतः 20,000/- प्रतिवर्ष की बचत होगी।

विद्युत कर्षण में ऊर्जा उपयोग को बेहतर बनाने के लिए भावी पहल

  • दक्षिण मध्य रेलवे

      • 10 वर्षों से अधिक प्रयोग में लिए जा रहे अत्यधिक पुराने विंडो एयर कंडीशनर के स्थान पर बीईई 5 स्टार रेटेड स्प्लिट एयर कंडीशनरों का प्रयोग।
      • परंपरागत इवैपरेटिव साइकिल एयर कंडीशनरों के स्थान पर सौर हाइब्रिड एयर कंडीशनरों का प्रावधान। रेलवे ने विद्युत लोको शेड/काजीपेट में ऐसे 6 एयर कंडीशनर लगाएं हैं।
      • परिभ्रमण क्षेत्र और माल यार्ड में हाई मास्ट टावर लाइट में एलईडी लाइटिंग/इंडक्शन लाइटिंग लगाई गई है। 800 वाट के इंडक्शन लैंपों के स्थान पर 150वाट के मेटल हैलिडे फिटिंग और 400 वाट के इंडक्शन लैंपों के स्थान पर 80 वाट के मेटल हैलिडे लगाए गए हैं।
      • 15 मिनट में बंद होने वाले विलंब(delay) टाइमर के साथ ऑन ड्यूटी उप स्टेशन अधीक्षक के नियंत्रण में वायरलेस की-टैग कंट्रोल द्वारा रेलवे स्टेशनों पर 70% लाइट कंट्रोल सिस्टम का प्रावधान।
      • 30 मिनट में बंद होने वाले विलंब(delay) टाइमर के साथ प्लेटफॉर्म पर 70% कंट्रोल लाइटिंग के द्वारा स्टेशन परिभ्रमण क्षेत्र में हाई मास्ट लाइट का संचालन। इस योजना के अंतर्गत 16 हाई मास्ट लाइट शामिल हैं। बाकी को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया जा रहा है।
      • रोलिंग परीक्षण लाइटों में 15 मिनट ऑफ टाइमर और रोलिंग परीक्षण लाइटों में एलईडी/इंडक्शन लैंपों का प्रावधान।
      • सभी कार्यलयों, कार्यालय भवनों, और आवासीय क्वार्टरों में पहले अधिभोग पर भी टी8/टी12 के स्थान पर टी5 एफटीएल लगाना।
      • कार्यालय परिसर तथा रेलवे स्टेशनों पर सभी वाटर कूलरों में क्लॉक टाइमर कंट्रोल का प्रावधान।
      • यात्री हाल्ट स्टेशनों पर स्टेशन लाइटिंग में एकल प्रकार के 30 मिनट ऑफ डिले टाइमर का प्रावधान।
      • रनिंग रूम और विश्रामालयों में लगे हुए इलेक्ट्रिक गीज़रों पर करंट ट्रॉंसफॉर्मर आधारित वन शॉट कट ऑफ कंट्रोल का प्रावधान।
      • महत्वपूर्ण कॉलोनियों में स्ट्रीट लाइटिंग पर डे लाइट सेंसर टाइप कंट्रोल का प्रावधान।
      • अन्य कॉलोनियों में टाइमर आधारित स्ट्रीट लाइट कंट्रोल का प्रावधान।
      • अस्पताल के वार्डों में लगे एयर कंडीशनरों के लिए डोर ऑपरेटेड लिमिट स्विच कंट्रोल का प्रावधान।


      i)   ऊर्जा लेखा परीक्षा और ऊर्जा खपत बिंदुओं के लिए मानदंड विकसित करने हेतु की गई पहल

      ट्रैक्शन:

      कृष्णा कैनाल ट्रैक्शन सब स्टेशन पर ऊर्जा लेखा परीक्षा किया जा रहा है, रिपोर्ट की प्रतीक्षा है।

      नॉन-ट्रैक्शन:
      • मार्च-2015 तक 142 लोकेशनों पर ऊर्जा लेखा परीक्षा का कार्य पूरा कर लिया गया है। 2015-16 के दौरान 30 लोकेशनों को चिन्हित किया गया है जिसमें से 9 लोकेशनों पर ऊर्जा लेखा परीक्षा का कार्य पूरा कर लिया गया है, शेष दिसंबर-2015 या उससे पहले पूरा कर लिया जाएगा।
      • मानदंड निर्धारण: सर्विस भवन में लाइट पावर घनत्व(एलपीडी) पर विचार करना प्रारंभ कर दिया गया है। मंडलों को 11.8 वाट/वर्ग मीटर की एलपीडी मानदंड प्राप्त करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
      • प्रमुख खपत वाले लोड की बेंचमार्किंग तदनुसार की जाएगी।


      ii)   ट्रैक्शन और नॉन-ट्रैक्शन ऊर्जा में बचत हेतु की गई पहल

      ट्रैक्शन:
      • स्टैंडबाई ट्रांसफॉर्मर को स्विच ऑफ करके ऊर्जा संरक्षण
      • यात्रा शेड, मालभाड़ा शेड यार्डों और रास्ते में 30 मिनट से अधिक समय के लिए लोकोमोटिव को बंद करना।
      • जब भी गाड़ी 5 मिनट से अधिक समय के लिए रूकी हो तो ब्लोअर बंद कर देना।
      • थ्री फेज़ लोको के साथ संचालित ट्रेन के लिए रिजेनरेटिव ब्रेकिंग का व्यापक प्रयोग

      नॉन-ट्रैक्शन:
      • 1750 kVA एमडी के साथ 5000 kVA पावर सब-स्टेशन को पूर्णतया बंद करना और सप्ताहांत( शनिवार एवं रविवार) के दौरान 3800 kVA एमडी सब-स्टेशन के साथ अन्य 5000 kVA द्वारा रिंग मेन सर्किट के माध्यम से लोड को फीड करना।
      • “नो लोड” करंट को समाप्त करने के लिए प्रारंभिक स्थल से सभी स्टैंड-बाई ट्रांसफर्मरों को बंद करना।
      • ऑफ पंपिंग अवधि में केवल पंपिंग स्टेशनों को फीड करने वाले ट्रांसफर्मरों को पूर्णतया बंद करना।
      • कार्यालय अवधि के पहले एवं बाद तथा लंच के समय वातानुकूलन लोड फीडर को स्विच ऑफ करना।


      iii)   ऊर्जा उपयोग को बेहतर बनाने के उद्देश्य से डिजाइन में सुधार लाने के लिए उठाए लिए कदम

      • पारंपरिक वाष्पीकरण वाले एयर कंडिशनरों की जगह एसपीवी हायब्रिड एयर-कंडिशनरों का उपयोग।
      • ट्रैवर्सर्स, EOT क्रेन तथा केंद्रीयकृत एयर-कंडिशनिंग के एयर हैंडलिंग यूनिटों में वीवीवीएफ ड्राइव की व्यवस्था।
      • डायनो ड्राइव परीक्षण में वीवीवीएफ ड्राइव की व्यवस्था।
      • लोकोमोटिव बैटरियों को चार्ज करने के लिए ऊर्जा-क्षम बैटरी चार्जिंग संयंत्र।
      • डीजल लोको शेड, गुंटुकल में केंद्रीयकृत अत्यधिक उच्च क्षमता वाले 160 एलपीएम के बदले वितरित कम्प्रेस्ड वायु स्रोत के रूप में 40 HP स्लिपरिंग इंडक्शन मोटर के साथ WDM2 के एक्सप्रेसर(लोको कम्प्रेसर) की व्यवस्था। यह योजना वायु परीक्षण के लिए C & W डिपो पर भी लागू की जा रही है।


  • मध्य रेलवे

    • गैर-कर्षण ऊर्जा खपत के अंतर्गत उठाए गए कदम

      गैर-कर्षण ऊर्जा खपत को कम करने के लिए निम्नलिखित कदम उठए जा रहे हैं।

      • उपयोगकर्ता विभागों को बिजली के उपयोग के लिए जिम्मेवार बनाना। डीआरएम द्वारा विभागीय बैठक के दौरान भी इसी की समीक्षा की जा रही है.
      • प्रमुख लोड केंद्रों पर एचटी खपत की रोजाना निगरानी करना तथा अधिक खपत को नियंत्रण करने के उपाय करना।
      • माल गोदामों एवं अन्य स्थानों के ऊंचे प्रकाश-स्तंभों को नियंत्रित करना तथा उपयोगकर्ता विभाग को जिम्मेवार बनाना।
      • एसी लोड को नॉन-एसी लोड से अलग करना और एसी लोड की निगरानी करना।
      • टी फिटिंग्स तथा सीएफएल एवं एलईडी आधारित लाइट्स की व्यवस्था।
      • विश्रामालयों एवं रनिंग रूम आदि में गीजर के उपयोग में कमी की निगरानी करना।
      • विश्रामालयों आदि में स्टोरेज प्रकार के गीजरों की बजाए तत्काल उपयोग में लाए जाने वाले गीजरों की योजना।
      • बिजली और पानी की बचत के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने वाले हाइब्रिड प्रणाली से युक्त विद्युत गीजरों की व्यवस्था।
      • अधिकारियों के चैंबर में ऑक्यूपैंसी सेंसर लगवाना ताकि चैंबर की लाइट एवं एसी को नियंत्रित किया जा सके।
      • अत्यधिक उपयोग वाली जगहों पर स्टार- अंकित एसी यूनिटों एवं ऊर्जा वंचकों का उपयोग।
      • कालोनियों/सेवा उपलब्ध कराने वाले भवनों को पानी सप्लाई करने वाले पंपों के उपयोग पर नियंत्रण
      • खपत वाले महत्वपूर्ण केंद्रों पर खपत का कोटा निर्धारण करना एवं रोजाना इसकी निगरानी करना।
      • जहाँ उचित हो, अपात्रता वाली जगहों से एसी यूनिट हटाए जाएँ।
      • ऑटोमेटिक टाइमर सेटिंग के माध्यम से स्ट्रीट लाइट को नियंत्रित किया जा सकता है।
      • उपकरणों को बदलने की योजना बनाते समय, ऊर्जा-क्षम उपकरणों के इस्तेमाल की योजना बनाई जाएगी।
      • खपत कम करने के लिए सभी प्लेटफॉर्मों पर 30 % एवं 70 % की लाइट पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
      • कम्प्रेशर प्लांट, लाइटिंग, बिजली के चूल्हों, वायु सर्कुलेटर एवं मशीनों आदि के इस्तेमाल में कमी लाने के लिए विशेष ध्यान देते हुए कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
      • ज्यादा इस्तेमाल वाले क्षेत्र में ऊर्जा की ऑडिटिंग की जाएगी और सिफारिशें लागू की जाएंगी।
      • ऊर्जा की बचत के उद्देश्य से सौर-शक्ति/फिटिंग्स/हवा के साथ हाइब्रिड पावर एवं सौर आदि जैसे गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के लिए और अधिक प्रस्ताव विकसित किए जाएंगे।
  • उत्तर मध्य रेलवे

    • गैर-कर्षण ऊर्जा खपत को कम करने के लिए उत्तर मध्य रलवेनिम्नलिखित कदम उठए गए हैं:

      • जीपीएस आधारित स्मार्ट सेंस मॉनिटरिंग सिस्टम।
      • कॉरिडोर, स्टेयरकेस, शौचालयों, बाथरूम में एल इ डी फिटिंग्स का इस्तेमाल
      • सीएफल/टी-5/एमएच/एचपीएसवी फिटिंगस की जगह सर्कुलेटिंग एरिया में स्ट्रीट लाइट
      • एचटी/एलटी सब-स्टेशनों में स्वचालित पावर फैक्टर करेक्शन पैनलों का इस्तेमाल
      • पुराने 90 वाट के सीलिंग फैन की जगह 60 वाट का फैन लगाना।
      • पारंपरिक फैन रेग्युलेटर की जगह इलेक्ट्रोनिक फैन रेग्युलेटर का इस्तेमाल
      • निओन साइनबोर्ड की जगह एलइडी आधारित स्टेशन नाम पट्ट के 6 प्रोविजन
      • यार्ड लाइटिंग/स्ट्रीट लाइटिगं के हाइ मास्ट टावरों पर टाइमर स्विच
      • एफटीएल सर्किटों एवं मेटल हेलिड सर्किटों में पारंपरिक बैलेस्ट की जगह इलेक्ट्रोनिक बैलेस्ट का इस्तेमाल
      • पंपों का ऑटोमेशन
      • पुराने अक्षम पंपों की की जगह ऊर्जा-क्षम पंपों का इस्तेमाल
      • क्वार्टर्ज के लिए कॉपर वायरिंग का इस्तेमाल
      • डीइएलपी योजना को प्रोत्साहित करना
      • 3 स्टार एवं उपरोक्त लेबल वाले इलेक्ट्रिकल उत्पाद एवं उपकरण का इस्तमाल
      • प्रमुख लोड केंद्रों की ऊर्जा ऑडिट
  • पश्चिम रेलवे

    • i) ऊर्जा क्षमता/संरक्षण के उपाय

      • ऊर्जा संरक्षण के उद्देश्य से टीआरडी में 0.98 की उच्च पीएफ की कमी है एवं प्रसारण एवं वितरण के नुकसान से बचने के लिए इसे बनाए रखा जाता है।उच्च पीफ को बनाए रखने के लिए, पश्चिम रेलवे को लगभग 2.32 करोड़ रु./माह का प्रोत्साहन/छूट दी जा रही है।
      • ट्रैक्शन सब-स्टेशन पर, स्टैंड-बाई ट्राँसफरमर को स्विच ऑफ रखा जाता है, ताकि कोई लोड नहीं होने के समय नुकसान से बचा जा सके।
      • ओएचई वोल्टेज को सीमा के अंतर्गत रखा जाता है और निम्न कैटनरी वोल्टेज से बचा जाता है। इस प्रकार, निम्न वोल्टेज के कारण उत्पन्न उच्च करंट की वजह से होने वाले नुकसान से बचा जाता है।

      पश्चिम रेलवे की वर्ष-वार खपत एवं एसइसी (गैर-कर्षण) निम्नानुसार हैः

      वर्ष गैर-कर्षण लक्ष्य एसईसी (KWH/KW)
      2010-11 1220.02 70.45
      2011-12 1157.34 70.08
      2012-13 1112.98 65.50
      2013-14 1111.81 63.32
      2014-15 1101.10 61.56

      पश्चिम रेलवे पर यह उपलब्धि स्टेशनों पर सौर शक्ति प्रणालियों, एलसी गेट्स, कालोनियों, स्टेशनों पर सोलर स्ट्रीट लाइट्स, इसके अलावा स्टेशनों पर एलइडी फिटिंग्स का प्रावधान, ऊर्जा-क्षम लाइट फिटिंगस का प्रावधान, पंपों का ऑटोमेशन, स्टार रेटिड उपकरणों का प्रावधान, सिगनलिंग सिस्टम आदि के माध्यम से 70 % लाइटिंग सर्किट्स का ऑटोमेशन जैसी कई हरित ऊर्जा पहलों के माध्यम से हासिल की गई है।

      कर्षण ऊर्जा की खपत गाड़ियों की ढुलाई में होती है। विद्युत इंजिन के लिए ऊर्जा संरक्षण उपायों की पहचान करके कार्य योजना तैयार की गई है। कार्य योजना के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं-

      रनिंग स्टाफ

      • सीसी+8+2 लदान सहित फॉयस लोड लेकर मंडल द्वारा जीटीकेएम का सही लेखा-जोखा।
      • किनारे लगे हुए बोर्डों के स्थलों की पहचान करना और कोस्टिंग बोर्डों का प्रावधान।
      • ऱाशन लोडवार और सेक्शनवार भार सहित ट्रिप का निर्धारण और अकुशल ड्राइवरों की निगरानी तथा परामर्श।
      • जब एकल इंजिन लदान/एलई का कार्य हो रहा हो, एमयू और ट्रिपलर में ट्रेलिंग लोको को स्विच ऑफ रखना।
      • 15 मिनट से अधिक डिटेंशन के लिए स्टेबलिंग यार्ड , ट्रिप शेड,लोको शेड में सहायक मशीनों को स्विच ऑफ रखना।
      • जब किसी भी यार्ड में ( सिंगल,एमयू,ट्रिपलर) लूप,ट्रिप शेड,लोको शेड में यदि 45 मिनट से अधिक का डिटेंशन होता है तो इंजन बंद रखें।
      • लोको पाइलट द्वारा डीबीआर एवं रिजेनरेटिव ब्रेकिंग का 100 प्रयोग।


      परिचालनिक कर्मचारी

      • सिगनलों का समय से बंद किया जाना सुनिश्चित करें।
      • धीमी गति से चलने वाली गाड़ियों मेल /एक्सप्रेस एवं पैसेंजर ट्रेन को प्राथमिकता देने के लिए उच्च गति की मालगाड़ियों जैसे सीओएनआरएजे(CONRAJ) को नियंत्रित न करें।
      • कर्मीदल को गाड़ी नियंत्रण/ स्टेशन/यार्ड में डिटेंशन के बारे में सूचित करें जिससे कर्मीदल ब्लोअर्स/इंजिनों को स्थित्यानुसार बंद कर सकें।
      • इंजिनों के एकल परिचालन से बचें।
      • 3 फेज़ लोको में रिजेनरेशन इष्टतम उपयोग के लिए अधिकतम संभव कोस्टिंग द्वारा ऊर्जा संरक्षण और रिजेनरेटिव ब्रेकिंग का कुशलतापूर्वक प्रयोग।


      iii) ऊर्जा लेखा परीक्षा के लिए की गई पहल

      पश्चिम रेलवे पर ऊर्जा लेखा परीक्षा करने के लिए 2010 के बीईई के नियम के अनुसार जारी किए गए दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है।

      पश्चिम रेलवे के निम्नलिखित स्थलों पर पहले ही ऊर्जा लेखा परीक्षा की जा चुकी है और उसकी संस्तुतियों को पहले ही लागू किया जा चुका है।

      क्रम सं कार्यक्षेत्रों का विवरण चिन्हित किए गए वर्क सेंटर लेखा परीक्षा का वर्ष के द्वारा लेखा परीक्षा किया गया
      1 चर्चगेट रेलवे स्टेशन और जेआरएच 2 nos. 2009-10 मेसर्स एन्कॉन एनर्जी मैनेजमेंट सर्विसेज़,औरंगाबाद
      2 वड़ोदरा स्टेशन और एनएआईआर कॉम्प्लेक्स 2 nos. 2009-10 मेसर्स एन्कॉन एनर्जी मैनेजमेंट सर्विसेज़,औरंगाबाद
      3 रतलाम मंडल में पंपिंग इंस्टालेशन 9 nos. 2009-10 श्री विवेक दीक्षित, ऊर्जा लेखा परीक्षक के रूप में वरि.मं.वि. इंजी.(पी) रतलाम द्वारा विभागीय स्तर पर
      4 सवारी मालडिब्बा कारखाना/दाहोद 1 nos. 2008-09 मेसर्स तुवसुद,दक्षिण एशिया नई दिल्ली
      5 रेलवे कॉलोनी,दाहोद 1 nos. 2009-10 मेसर्स ईआरडीए
      6 कैरिज वर्कशॉप, लोअर परेल 1 nos. 2012-13 मेसर्स सौरभ इंजी..
      7 मकरपुरा टीएसएस 1 nos. 2007-08 मेसर्स ईआरडीए
      8 भेस्टान टीएसएस 1 nos. 2007-08 श्री संजय सागर, ऊर्जा लेखा परीक्षक के रूप में वरि.मं. वि. इंजी./टीआरडी/मुख्यालय द्वारा विभागीय स्तर पर
      9 महालक्ष्मी कारखाना 1 no. 2007-08 मेसर्स साकेत प्रोजेक्ट्स/अहमदाबाद
      10 वटवा, डीजलशेड 1 no. 2015-16 श्री ललित तोमर/मं.वि.इंजी.कोचिंग/अहमदाबाद द्वारा विभागीय तौर पर
      11 मंरेप्र कार्यालय, मंडल चिकित्सालय, पंपिंग इंस्टॉलेशन, भावनगर पारा 3 nos. 2015-16 मेसर्स दर्शन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजी. एंड टेक्नॉलॉजी/राजकोट

      पश्चिम रेलवे पर ऊर्जा लेखा परीक्षा के लिए 25 स्थलों को चिन्हित कर लिया गया है।

      क्रम सं स्थान टिप्पणी
      1 महाप्रबंधक का कार्यालय(ओल्ड बिल्डिंग) प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। टीडीसी 31.12.2015
      2 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय,मुंबई सेंट्रल
      3 मुंबई सेंट्रल स्टेशन
      4 बांद्रा टर्मिनस स्टेशन
      5 जगजीवन राम अस्पताल
      6 लोअर परेल कारखाना
      7 एमईएमयू शेड,वड़ोदरा
      8 प्रतापनगर कारखाना
      9 मंडल रेल प्रबंधक, रतलाम
      10 मंडल चिकित्सालय,रतलाम
      11 इंदौर स्टेशन
      12 डीजल शेड, रतलाम
      13 मंरेप्र कार्यालय, अहमदाबाद
      14 मंडल चिकित्सालय, साबरमती
      15 अहमदाबाद स्टेशन
      16 मेहसाणा स्टेशन
      17 डीजल शेड, वटवा मई-2015 में ऊर्जा लेखा परीक्षा पूरा कर लिया गया। अनुशंसाओं को क्रियान्वित किया जा रहा है।
      18 मंरेप्र कार्यालय, राजकोट प्रस्ताव प्रक्रियाधीन। टीडीसी 31.12.2015
      19 मंडल चिकित्सालय, राजकोट
      20 राजकोट स्टेशन
      21 हापा यार्ड
      22 मंडल चिकित्सालय, भावनगर ऊर्जा लेखा परीक्षा अगस्त-2015 में पूरी की गई। अनुशंसाओं का अध्धयन किया जा रहा है।
      23 महालक्ष्मी कारखाना प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। टीडीसी 31.12.2015
      24 लेडी जैक्सन चिकित्सालय,दाहोद.
      25 ईएमयू कारशेड,मुंबई सेंट्रल,कांदीवली,विरार
      शेड/ कारखाना बड़ौदा बीएल दाहोद
      ऊर्जा लेखा परीक्षा नवंबर 2012 जुलाई 2013 जून – 2008
      ISO 50001 व.मं.वि.इंजी./पी द्वारा किया जा रहा है। निविदा 06.10.15 को देय है। प्राप्त की गई विस्तृत प्राक्कलन की विधीक्षा की गई निविदा आमंत्रित की जा रही है।

      कर्षण सबस्टेशनों की ऊर्जा लेखापरीक्षा:

      वर्ष-2007 में मेसर्स ईआरडीए द्वारा एमपीआर टीएसएस की ऊर्जा लेखा परीक्षा की गई। मेसर्स ईआरडीए की संस्तुतियों के अनुसार, पावर फैक्टर को 0.98 और उससे ऊपर तक बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त कैपेसिटर बैंक की व्यवस्था की गई है। इससे रेलवे का पावर फैक्टर इंसेंटिव 58.71 लाख रू. प्रति वर्ष रहा ।

      इसी प्रकार, भेस्टान टीएसएस का र्जा लेखा परीक्षा भी वर्ष 2007 में उपमुख्य.वि.इंजी./टीआरडी/सीसीजी( ऊर्जा लेखा परीक्षक) किया गया और संसतुतियों को क्रियान्वित भी किया गया तथा 40 लाख रू. की प्रतिवर्ष बचत की गई क्योंकि पीएफ इंसेंटिव रेलवे द्वारा प्राप्त किया जा रहा है।

      ऊर्जा संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए रेलवे अपने सभी टीएसएस में हर तरह की कार्रवाई कर रहा है। हालांकि, बीईई –ऊर्जा संरक्षण ब्यूरो की महत्वपूर्ण आवश्यकता के सारांश के अनुसार- ईडी(ईएम)-ऊर्जा लेखा परीक्षा विनियम-2010 के संचलन हेतु समय और अंतराल, चर्चा के दौरान महानिदेशक/बीईई को बता दिए गए हैं कि ट्रैक्शन सबस्टेशन की लेखा परीक्षा आवश्यक नहीं है।

      इसे देखते हुए किसी टीएसएस की कोई लेखा परीक्षा अब नहीं की जा रही है।

      भवनों का आईएसओ 50001 और संस्थापन:

      भारतीय रेल में पहली बार– राजकोट, मुंबई सेंट्रल, भावनगर पारा, अहमदाबाद, विद्युत लोकोशेड, वलसाड और एसटी स्टेशन के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालयों के लिए ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली के लिए आईएसओ 50001 प्राप्त किया गया है। 20 अन्य लोकेशनों के लिए आईएसओ 50001 प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव पाइपलाइन में हैं(विचाराधीन हैं)

      iv) सीएमएस के माध्यम से थ्री फेज़ विद्युत लोकोमोटिव पर ऊर्जा उत्पादन की कर्षण और गैर-कर्षण ऊर्जा मॉनीटरिंग में बचत के लिए की जाने वाली पहल।

      प्रौद्योगिक उन्नति और कुशल स्विचिंग उपकरणों की उपलब्धता के साथ,रिजेनरेटिव ब्रेकिंग 3 फेज़ जीटीओ लोको के साथ डिजाइन में आ गया है। सीएमएस के माध्यम से साइनिंग ऑफ के समय ऊर्जा और ट्रेन लोड रीडिंग की एंट्री के लिए सभी लोको पाइलट/सहायक लोको पाइलटों को परामर्श देने हेतु 15 अगस्त को एक हफ्ते का अभियान चलाया गया । इन आकंडों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि किसी खास सेक्शन में और लदानवार मानदंड सुनिश्चित किया जा सके। अभियान के दौरान लोको पाइलटों को 3 फेज़ लोको में रिजेनरेशन को बेहतर बनाने के लिए रिजेनरेटिव ब्रेकिंग के कुशल प्रयोग और कोस्टिंग के दौरान ऊर्जा संरक्षण हेतु प्रोत्साहित और अभिप्रेरित किया गया।

      पश्चिम रेलवे पर कई तरह की हरित क्रांति पहल के माध्यम से गैर-कर्षण में बचत की गई, जैसे- स्टेशनों पर सौर शक्ति प्रणालियों का प्रावधान, समपार फाटक, स्टेशनों, कॉलोनियों में सौर स्ट्रीट लाइटों का प्रावधान, पारंपरिक ऊर्जा संरक्षण उपायों जैसे- स्टेशनों पर एलईडी फिटिंग्स का प्रावधान, ऊर्जा संरक्षित लाइट फिटिंग्स का प्रावधान, पंपों का ऑटोमेशन, स्टार रेटेड उपकरणों का प्रावधान, सिग्नलिंग सिस्टम के द्वारा प्लेटफॉर्मों पर 70% लाइटिंग सर्किट के ऑटोमेशन आदि।

      v) ऊर्जा उपयोग में सुधार लाने के लिए डिजाइन को बेहतर बनाने के लिए की गई पहल

      1. मुंबई उपनगरीय सेक्शन में 1500 वाट डी.सी को 25 केवी एसी सिस्टम में कई चरणों में किया गया जो कि उपनगरीय यातायात और मौजूदा पुराने पुलों के नीचे ओएचई क्लियरेंस को देखते हुए लगभग असंभव कार्य था। 1500 वाट डी.सी को 25 केवी एसी सिस्टम के कन्वर्जन का कार्य दिनांक 05.02.2012 को पूरा कर लिया गया।

      25 केवी एसी के साथ, सिस्टम में ऊर्जा ह्रास में काफी कमी आई है और ईएमयू और लोको में 3 फेज़ तकनीक सहित जेनरेशन संभव हुआ है। 2013-14 से ईएमयू द्वारा खपत की गई ऊर्जा का लगभग 30% रिजेनरेशन द्वारा सिस्टम में फीडबैक दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2014-15 में 82.56 एमयू ऊर्जा की बचत की गई जिसकी कीमत सगभग 65.39 रू. है।

      2. सिस्टम में नुकसान को कम करने के लिए अन्य पहल:

      • ओलीवर-जी उपस्कर द्वारा आवधिक करंट कलेक्शन जांच की जा रही है और दुष्कर खराबियों को तत्काल दूर किया जा रहा है जिससे ओएचई और पैंटो पैन के बीच कोई चिंगारी न निकले।
      • ओएचई में हॉट स्पॉट का पता लगाने और उसे समय पर ठीक करने के लिए के लिए रूफ माउंटेड थर्मल इमेजिंग कैमरा द्वारा ओएचई की जांच करना जिससे न केवल संभाव्य खराबियों से बचा जा सके बल्कि ऊर्जा हानि को भी रोका जा सके। उपस्कर अत्यधिक गर्म हो जाने की घटना से बचने के लिए स्विचिंग स्टेसनों और कर्षण उपकेंद्रों में भी इसी प्रकार जांचें की जा रही है।
      • पहले उप सेक्टर में फीडिंग छोर से आइसोलेटरों पर 105 वर्ग मिमी जंपरों से बदला जा रहा है।
      • 1250 एम्पियर क्षमता वाले आइसोलेटरों के स्थान पर 1600 एंपियर क्षमता वाले आइसोलेटरों की व्यवस्था की जा रही है।


      3. सिग्नलिंग सिस्टम द्वारा प्लेटफॉर्म पर 70% लाइटिंग सर्किट का ऑटोमेशन

      vi) & xi) ट्रैक्शन और गैर-कर्षण क्षेत्रों में एसईसी में सुधार

      कर्षण क्षेत्र में सुधार

      एसईसी लक्ष्य 2015-16 माह के दौरान उपलब्धियां (जुलाई) वर्ष के दौरान संचयी (अप्रैल-जुलाई) % सुधार(संचयी)
      2014-15 2015-16 2014-15 2015-16
      माल 6.21 6.79 7.86 6.33 7.50 - 18.48
      यात्री 19.70 19.67 19.73 19.65 19.70 - 0.25

      गैर-कर्षण क्षेत्र में सुधार

      पश्चिम रेलवे की वर्षवार खपत और एसईसी(गैर-कर्षण) निम्नलिखित है:

      वर्ष गैर-कर्षण प्रयोजन एसईसी (किलोवाटघं/किलोवाट)
      2010-11 1220.02 70.45
      2011-12 1157.34 70.08
      2012-13 1112.98 65.50
      2013-14 1111.81 63.32
      2014-15 1101.10 61.56

      (vii) मांग पक्ष प्रबंधन/भवन प्रबंधन प्रणाली

      (क) प्रत्येक कर्षण सबस्टेशन की संविदा मांग प्रति लोड पैटर्न के अनुकूल रखी जाती है जिससे डीआईएससीओएम को कोई दंड प्रभार न देना पड़े। इसके लिए, मंडल द्वारा संविदा मांग की अर्धवार्षिक समीक्षा की जाती है और तदनुसार प्रधान कार्यालय द्वारा अनुमोदन दिया जाता है।

      (ख) पश्चिम रेलवे के निम्नलिखित भवनों को बीईई द्वारा स्टार रेटिंग की गई है।:

      • मुंबई सेंट्रल का मं.रे.प्र. कार्यालय – 5 स्टार रेटिंग
      • वड़ोदरा का मं.रे.प्र. कार्यालय- 5 स्टार रेटिंग
      • रतलाम का मं.रे.प्र.कार्यालय-5 स्टार रेटिंग
      • अहमदाबाद का मं.रे.प्र.कार्यालय-5 स्टार रेटिंग
      • राजकोट का मं.रे.प्र. कार्यालय-5 स्टार रेटिंग
      • भावनगर का मं.रे.प्र.कार्यालय-3 स्टार रेटिंग


      (ग) भारतीय रेल पर पहली बार मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय/राजकोट , मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय/भावनगर, मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय – भावनगर पारा, मंडल रेल प्रबंधक/अहमदाबाद, विद्युत लोको शेड-बीएल और एसटी स्टेशन के लिए से ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली के लिए आईएसओ प्राप्त कर लिया गया है। 20 अन्य लोकेशनों के लिए आईएसओ 50001 प्राप्त करने का प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है।

      viii) विद्युत लोको/ड्राइविंग तकनीक में ऊर्जा संरक्षण

      खपत की गई ऊर्जा और रिजेनरेशन डेटा सीएमएस में एलपी द्वारा फीड किए गए हैं। किसी खास सेक्शन में और लदानवार मानदंड सुनिश्चित करने के लिए इन डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। ऐसे अकुशल ड्राइवरों ,जिनका रिजेनरेशन कम है और ऊर्जा खपत ज्यादा है ,उनमें सुधार हेतु नियमित काउंसलिंग की जा रही है।

      xi) सामान्य पावर आपूर्ति में ऊर्जा संरक्षण.

      उपरोक्त के अनुसार

      x) रेलवे कोचों पर सौर पैनल

      साइंस एक्सप्रेस के 2 कोचों पर सौर पैनल लगाए गए हैं

      xii) 3 फेज़ लोकोमोटिव में रिजेनरेटिव ब्रेकिंग के कारण बचत:

      विद्युत लोकोमोटिव के लिए 3 फेज़ तकनीक अपनाने के कारण ऊर्जा खपत में विशेष सुधार हुआ है जिसने ऊर्जा खपत का 15 से 17% रिजेनरेशन आसान कर दिया है। वर्तमान में, औसतन 42 3-फेज़ लोको प्रति दिन अर्थात् कुल कटौती समय का 22% पश्चिम रेलवे पर गाड़ी परिचालन के लिए उपलब्ध है।जेडईटीसी/बड़ौदा पर सिमुलेटर का प्रयोग करते हुए ड्राइविंग तकनीक को सुधारने के लिए नियमित रूप से ड्राइवरों की काउंसलिंग की जा रही है। अप्रैल-15 से जुलाई-15 के दौरान अनुमानतः 6.71 मिलियन यूनिट रिजेनरेट की गई जिसके परिणामस्वरूप लगभग 4.90 करोड़ की बचत की गई।

      xiii) स्टार रेटेड उपकरणों का प्रयोग

      पश्चिम रेलवे पर स्टार रेटेड उपकरण जैसे- ऊर्जा सक्षम सबमर्सिबल पंप,सीलिंग फैन,एयर कंडीशनर,रेफ्रिजरेटर, आदि की व्यवस्था की जा रही है।पश्चिम रेलवे पर पिछले 5 वर्षों में खरीदे गए उपकरणों का विवरण निम्नलिखित है:

      वर्ष स्टार रेटेड उपकरण
      2010-11 564
      2011-12 733
      2012-13 742
      2013-14 896
      2014-15 733

      xiv) रेल परिसर में एलईडी का प्रयोग

      • भारतीय रेल में पहली बार सीएसआर पहल के अंतर्गत मेसर्स सिस्का एलईडी द्वारा पूरे मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर एलईडी लाइटों का प्रावधान किया गया है।
      • पश्चिम रेलवे के अन्य 8 स्टेशनों पर (बिलीमोरा, कोठाज, ओड, मकरपुरा,बमामा, बरजथी, साबरमती एवं पालनपुर) एलईडी लाइटिंग की व्यवस्था की गई।
      • पश्चिम रेलवे पर 6538 सं. को बदले जाने हेतु आइडेंटिफाई किया गया है। अब तक निम्नलिखित को बदला जा चुका है:
      • मुंबई सेंट्रल मंडल में 820
      • बड़ौदा मंडल में 106
      • अहमदाबाद मंडल में 37


      xv) डीईएलपी योजना के अंतर्गत खरीदे गए एलईडी लैंपों की स्थिति

      विद्युत मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम के संयुक्त उद्यम से विद्युत मंत्रालय,मेसर्स एनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड(ईईएसएल) के जरिए घरेलू संरक्षण लाइटिंग कार्यक्रम (डीईएलपी) योजना के अंतर्गत लोगों को 7 वाट के ऊर्जा संरक्षित एलईडी बल्ब के वितरण की सुविधा मुहैया करा रहा है और यह लाभ रेल कर्मचारियों को को देने के लिए इसकी कीमत केवल 100/- रखी गई है (जबकि इसी बव्ब की बाजार में कीमक 250-300 रू. है) ईईएसएल वैध पहचान पत्र रखने वाले प्रत्येक कर्मचारी को 10 एलईडी बव्ब 100/- की कीमत के हिसाब से देगा।

      महाप्रबंधक/पश्चिम रेलवे द्वारा दिनांक 11.09.2015 को पश्चिम रेलवे पर इस योजना का शुभारंभ किया गया। पश्चिम रेलवे पर अब तक 15251 एलईडी बल्ब वितरित किए जा चुके हैं।

      मद सं. xvi) डीसी/एसी कन्वर्जन

      मुंबई उपनगरीय सेक्शन में 1500 वाट डी.सी को 25 केवी एसी सिस्टम में कई चरणों में किया गया जो कि उपनगरीय यातायात और मौजूदा पुराने पुलों के नीचे ओएचई क्लियरेंस को देखते हुए लगभग असंभव कार्य था। 1500 वाट डी.सी को 25 केवी एसी सिस्टम के कन्वर्जन का कार्य दिनांक 05.02.2012 को पूरा कर लिया गया।

  • उत्तर पश्चिम रेलवे

    • EnergyUtilization11

      अजमेर रेलवे स्टेशन (उत्तर पश्चिमी रेलवे) में एलईडी लाइट्स के साथ उच्च मास्ट प्रकाश टावर्स

    • जयपुर मंडल में यूएनडीपी परियोजना के अंतर्गत जीएसएम/जीपीआरस के माध्यम से पंपिंग इंस्टालेशन का ऑटोमेशन और रिमोट कंट्रोल।
    • 90/60 वाट के सीलिंग फैन के स्थान पर 30 वाट के सीलिंग फैन का प्रयोग।
    • टी-5/टी8इफएल ट्यूब के स्थान पर एलईडी लाइटों का प्रयोग
    • कोचों में ऊर्जा संरक्षिक एलईडी प्रकाशपंजों का प्रयोग।
    • 40 वाट के पारंपरिक प्रकार के लैंप के स्थान पर 5 वाट के एलईडी आधारित टेल लैंप का प्रयोग
    • 15 वाट के पारंपरिक प्रकार के लैंप के स्थान पर एलईडी आधारित लाइट लाइट –सह- बर्थ संकेतक लाइटों का प्रयोग।
    • 18 वाट के फ्लोरेसेंट ट्यूब लाइटों के स्थान पर 11 वाट के सीएफएल फिटिंग्स का प्रयोग।
    • वातानुकूलित ईओजी कोचों में ईंधन खपत के लिए कैपेसिटर बैंक लगाए जा रहै हैं।
    • ई-बीम कोच वायरिंग के लिए केबल के प्रयोग किया जा रहा है।
    • रिजेनरेटिव प्रकार की बैट्री चार्जर, डाइना ड्राइव मशीन , आल्टीमेटर और आरआरयू/ईआरआरयू टेस्टिंग बेंच कारखानों और कोचिंग डिपो में इंस्टाल कर दी गई है।
    • सिक लाइन में पावर कार के बिना ईओजी कोचों की टेस्टिंग के लिए जयपुर,बीकानेर और जोधपुर में टेस्टिंग गैजेट लगा दिए गए हैं।