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भारतीय रेलवे की हरित ऊर्जा पहल

चल स्टॉक में ऊर्जा क्षमता हेतु नीतिगत उद्देश्य

भारतीय रेल में विद्युत कर्षण ऊर्जा खपत लगभग 15 अरब यूनिट है और 2015-16 में (बीई) कर्षण ऊर्जा बिल लगभग 11218 करोड़ है। भारतीय रेल के कुल कार्य व्यय का लगभग 22% इससे ही बनता है ,यहां तक कि ऊर्जा पुनरूत्पादन में छोटी सी वृद्धि भारतीय रेल के विद्युत खपत में कमी पर पर्याप्त असर डाल सकती है और उसके परिणामस्वरूप विद्युत बिल में भी।

विद्युत इंजिनों पर हरित पहल

क. थ्री फेज़ उच्च अश्व शक्ति वाले इंजिन

विद्युत इंजनों पर हरित पहल करने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए भारतीय रेल ने तकनीकी स्थानांतरण (टीओटी) के साथ वर्ष 1995 में मेसर्स एबीबी/स्विट्जरलैंड से नई पीढ़ी के थ्री फेज़ उच्च अश्वशक्ति वाले इंजिन खरीदे थे। इन इंजनों में ऊर्जाक्षम अत्याधुनिक जीटीओ प्रोपल्शन सिस्टम से युक्त थे जो 20 प्रतिशत तक बिजली रिजेनरेट करने में सक्षम है। ये रिजेनरेट की गई ऊर्जा ग्रिड में वापस फीडबैक की जाती है तथा सेक्शन पर चलने वाली अन्य गाड़ियों के लिए इस्तेमाल की जाती है दजिसके परिणामस्वरूप ट्रैक्शन सप्लाई बिल में कमी आती है तथा CO2 उत्सर्जन में भी कमी आती है।

ख. थ्री फेज़ इंजिनों का इन-हाऊस उत्पादन

परंपरागत टैप चेंजर लोकोमोटिव और थ्री फेज लोकोमोटिव में रिजेनरेटिव ब्रेकिंग फीचर के अंतर्निहित लाभ पर विचार करते हुए भारतीय रेल ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऐसे लोको के उत्पादन को धीरे-धीरे बढ़ाया था। 31 अगस्त 2015 तक 918 थ्री फेज़ लोकोमोटिव सेवा में थे। अब भारतीय रेल ने परंपरागत लोकोमोटिव के उत्पादन को रोकने और 2016-17 से केवल थ्री फेज लोकोमोटिव बनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया।

ग.कर्षण प्रोपल्शन सिस्टम में आईजीबीटी तकनीकी पर शिफ्ट करना

थ्री फेज़ लोकोमोटिव की ऊर्जा क्षमता के और अधिक बेहतरीन उपयोग के लिए इन सभी लोकोमोटिव को अब आईजीबीटी आधारित ट्रैक्शन प्रोपल्शन सिस्टम उपलब्ध कराया जा रहा है। इंडिपेंडेंट एक्सल कंट्रोल आईजीबीटी आधारित ट्रैक्शन प्रोपल्शन सिस्टम वर्तमान जीटीओ आधारित सिस्टम की अपेक्षा अधिक विश्वसनीय और ऊर्जा क्षमतायुक्त हैं।

घ.ऊर्जा खपत और पुनरूत्पादन का मानदंड निर्धारण

मालभाड़ा एवं यात्री परिचालन दोनों के लिए विशेष गाड़ी सेवाएं और सेक्शनों के ऊर्जा खपत हेतु मानदंड निर्धारित करने के प्रयास किए गए हैं। लोको पाइलटों को ऊर्जा खपत मॉनीटर करने और पुनरूत्पादन बढ़ाने के सुझाव दिए जा रहे हैं।

Head on Generation (HOG) schemes for Electric loco haul coaching train

वर्तमान में ,राजधानी और शताब्दी गाड़ियों में ट्रेन लाइटिंग,पंखे और एसी और पैंट्री इत्यादि (होटल लोड के रूप में संदर्भित). के लिए बिजली आपूर्ति हेतु गाड़ियों के दोनों तरफ दो डीज़ल जेनरेटर पावर कार लगाई जाती है। इन कोलाहलपूर्ण,वायु प्रदूषण करने वाली और अलाभकर पावर कारों को हटाने के लिए कुछ विद्युत लोकोमोटिव पर होटल लोड कन्वर्र्टर्स को आजमाया जा रहा है, जो कि लोको पैंटोग्राफ के माध्यम से शिरोपरि ट्रैक्शन पावर सप्लाई से होटल लोड की पूर्ति के लिए शुद्ध बिजली आपूर्ति करेगा। अंतर्निहित आर्थिक सहायता एवं लाभ को देखते हुए और अधिक यात्री विद्युत लोकोमोटिव को होटल लोड कन्वर्टर युक्त बनाने की योजना है। वर्तमान में, उत्तर और दक्षिण रेलवे पर 5 डब्ल्यूएपी7 लोको गहन फील्ड ट्रायल के अंतर्गत हैं।इससे पावर कारों से होने वाले वायु प्रदूषण में कमी के साथ-साथ जीवाश्म ईंधन ऊर्जा के स्थान पर शुद्ध ऊर्जा प्रयोग के द्वारा कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में भी कमी आएगी।