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भारतीय रेलवे की हरित ऊर्जा पहल
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  • भारतीय रेल के लिए 1 गीगावाट सौर लक्ष्य को प्राप्त करना:

    • ऊर्जा संसाधनों का एक महत्वपूर्ण ग्राहक होने के कारण भारतीय रेल के लिए यह महत्वपूर्ण है कि पर्यावरण पर कम से कम दुष्प्रभाव डालने वाले किफायती ऊर्जा प्रणाली विकल्पों की पहचान की जाए। भारतीय रेल के विज़न-2020 दस्तावेज का एक मुख्य लक्ष्य है कि रेलवे की अपेक्षित ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कम से कम 10% नवीकरण योग्य साधनों का इस्तेमाल किया जाए । इसके अतिरिक्त रेल बजट-2015-16 में यह उद्घोषणा की गई कि “जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के लिए यह अभीष्ट है कि रेलों के सौर मिशन के एक अंग के रूप में सौर शक्ति के स्रोत को बढ़ाया जाए। इसके अलावा, अगले पांच वर्षों में डेवलपर द्वारा रेलवे की /निजी भूमि पर और रेल भवनों की छतों पर उनके अपने खर्चे पर और किसी प्रकार की व्यावहारिक कमी होने पर गैर-अक्षय ऊर्जा मंत्रालय की वित्तीय सहायता से 1000 मेगावाट के सौर प्लांट स्थापित किए जाएं. भारतीय रेल की इस पहल से राष्ट्रीय ऊर्जा मिशन के अंतर्गत भारत के 100 गीगावाट वाले सौर प्लांट की लक्ष्य प्राप्ति के योगदान में एक बड़ी उपलब्धि होगी। रेलवे की योजना है कि ऐसे भवन जिनकी छत पर स्थान उपलब्ध है, प्लेटफॉर्म, वर्कशॉप और खाली स्थान, जिसकी व्यावसायिक कीमत बहुत ज्यादा नहीं है, का इस प्रयोजन हेतु उपयोग किया जाए। हाल में ही, ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार अनुमानित प्राक्कलन इस बात का संकेत करता है कि भारतीय रेल की इस पहल से कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन 45 एमटी तक कम हो जाएगा।

      भारतीय रेल द्वारा 1 गीगावाट का सौर लक्ष्य को प्राप्त करना सुनिश्चित करने के लिए मुख्य रूप से वित्त, सौर ऊर्जा हेतु भूमि उपयोग की रूपरेखा और सांस्थानिक तंत्र को सुव्यवस्थित करना जैसे तीन क्षेत्रों की पहचान की गई है। रेलवे का ध्यान सौर पीवी परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीयन सुनिश्चित करने के लिए पीपीपी मोड में अभिनव वितीयन के माध्यम से उपलब्ध सौर संभावना का इस्तेमाल करने पर है। जहां तक खाली स्थान के उपयोग का संबंध है, रेलवे ने पहले ही भूमि के उपयुक्त क्षेत्रों(टुकड़ों) की पहचान कर ली है, जिसका उपयोग बड़े सौर पीवी परियोजनाओं को स्थापित करने में किया जा सकता है। इन लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु रेलवे ने समुचित समन्वय एवं समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित विभागों को शामिल करते हुए रेलवे के भवनों की छतों पर 50 मेगावाट के सौर यूनिटों को लगाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है।

      इसके अतिरिक्त, रेल बजट 2015-16 में की गई उद्घोषणा के अनुसार सौर पीवी की इंस्टॉल की गई 1000 मेगावाट क्षमता वाले ,जो रेलवे के सौर मिशन का हिस्से के रूप में एमएनआरई से केंद्रीय वित्तीय सहायता के माध्यम से छत पर 500 मेगावाट की सौर यूनिट लगाने तथा सार्वजनिक उपक्रम योजना के तहत एमएनआरई से सहायता प्राप्त कर 200 मेगावाट के अतिरिक्त सौर यूनिटों के अधिष्ठापन तथा शेष को खाली स्थान पर लगाने की योजना है।इसकी व्यवहार्यता का अध्ययन किया जा रहा है

  • अब तक का सफर

    • o अब तक भारतीय रेल ने समपार फाटकों,वे साइड रेलवे स्टेशनों पर 10.5 मेगावाट पावर के सौर ऊर्जा के उपस्कर, सौर आधारित स्ट्रीट लाइटें, प्रशिक्षण संस्थान/रनिंग रूम/अस्पताल/विश्रामालय/कैंटीन/बेस किचन में सौर वाटर हीटर लगाएं हैं। इस अभियान के अंतर्गत कार्यान्वित की गई प्रमुख परियोजनाएं निम्नलिखित हैं-

      • रायबरेली पर 2 मेगावाट
      • कटरा में (रेलवे स्टेशन) छतों पर 1 मेगावाट
      • रेल भवन में 30 किलोवाट पावर का सौर प्लांट
      • द.म.रेलवे, तिरूपति स्टेशन, अजमेर स्टेशन पर महाप्रबंधक भवन में प्रत्येक पर 40 किलोवाट पावर

      श्री माता वैष्णों देवी ,कटरा रेलवे स्टेशन भवन पर 1 मेगावाट पावर के सौर शक्ति प्लांट का यंत्र:

      एनआइटी जारी करने की तिथि01.8.2014
      निविदा लेखन की तिथि16.09.2014
      कार्य की अनुबंधित राशिRs. 8.52 करोड़
      कार्यपालक एजेंसीमेसर्स राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक एंड इंस्ट्रुमेंट्स लिमिटेड/जयपुर(पीएसयू)
      250 वाट शक्ति का सौर पीवी मॉड्यूल4000 no.
      अधिष्ठापन की तिथि31.03.2015
      लागत लाभ
      सौर शक्ति प्लांट से प्रतिवर्ष उत्पादन14,45,000 यूनिट (4000 to 500 यूनिट प्रतिमाह)
      औसत वार्षिक बचतरू. 1 करोड़
      लौटाने की अवधि8.5 वर्ष

      कटरा रेलवे स्टेशन पर सौर पीवी पैनल



      इसके अतिरिक्त, भारतीय रेल हरित ऊर्जा पहल का हिस्सा होने के नाते 200 स्टेशनों, 21 प्रशासनिक भवनों, 2000 समपार फाटकों पर लगभग 7 मेगावाट के सौर पीवी मॉड्यूल के ग्रिड कनेक्टेड सोलर पावर इंस्टालेशन किए जाने पर विचार कर रही है। भारतीय रेल सार्वजनिक निजी भागीदारी से रेलवे स्टेशनों की छत की जगह और भूमि का इस्तेमाल करके सौर ऊर्जा उपस्करों को लगाने की संभावना पर भी विचार कर रही है. क्षेत्रीय रेलों को 50 मेगावाट शक्ति उपलब्ध कराने हेतु आइडेंटिफाइ कर लिया गया है।

  • रेल कोच फैक्ट्री /रायबरेली – हरित कारखाना:

    • o 2 मेगावाट सौर ऊर्जा प्लांट लगाया गया है जिसमें वार्षिक 2.8 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है। भारतीय रेल का पहला कैप्टिव सौर ऊर्जा प्लांट। पूरी फैक्ट्री और रेलवे कॉलोनी सौर ऊर्जा पर चल रही है।

         2 मेगावाट सौर ऊर्जा प्लांट-रेल कोच फैक्ट्री, रायबरेली
         2 मेगावाट सौर ऊर्जा प्लांट-रेल कोच फैक्ट्री, रायबरेली
  • जहां संभव हो अक्षत ऊर्जा उत्पादन :

    • o भारतीय रेल ने स्वयं परम अग्रता पर अक्षय ऊर्जा को अपनाकर कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए वचनबद्ध है। सौर ऊर्जा उत्पादन के प्रयोग के कुछ अभिनव कार्यान्वयनः:

         समपार फाटकों पर हाइब्रिड सिस्टम
      पश्चिम रेलवे के भचाऊ स्टेशन के समपार फाटक पर प्रकाश हेतु हाइब्रिड सिस्टम

         रेलवे कॉलोनियों में सौर आधारित स्ट्रीट लाइट
         स्टेशनों पर सौर पीवी पैनल (उत्तर पश्चिम रेलवे)

         स्टेशनों पर सौर पीवी पैनल (उत्तर पश्चिम रेलवे)
      बीकानेर में श्री डूंगरगढ़ में 1 एचपी का सौर पंप लगाया गया।

         जयपुर (उ.प.ऱे.) रनिंग रूम में सौर वाटर हीटर
         नीमच स्टेशन भवन(छत) पर सौर पैनल


      उपरोक्त में हर संभव तरीके से सौर ऊर्जा उपस्करों का प्रयोग शामिल है, जैसे-

      • मंडल मुख्यालय, क्षेत्रीय मुख्यालय, अनुरक्षण डिपो, शेड और कारखाने में ग्रिड कनेक्टेड/ऑप ग्रिड सौर पैनल लगाए गए हैं।
      • पवन और सौर ऊर्जा को पूरी तरह क्रियान्वित करने के लिए मौजूदा पावर सप्लाई के अतिरिक्त स्टेशनों पर सौर+पवन हाईब्रिड पावर सिस्टम
      • सभी रेलवे स्टेशनों,विश्रामालयों,रनिंग रूम,अस्पतालों,बेस किचन,और अन्य रेलवे परिसर में सौर आधारित वाटर हीटिंग सिस्टम
      • रेलवे संस्थानों, प्रशिक्षण स्कूल, विश्रामालय, बेस किचन और अन्य रेलवे परिसरों में सौर कुकर का इस्तेमाल

  • रेल कोचों पर हरित पहल:

    • नैरोगेज (गाड़ियों) की छतों पर सौर पैनल

         नैरोगेज कोच पर सौर पीवी पैनल
         नैरोगेज कोच पर सौर पीवी पैनल


         नैरोगेज कोच पर सौर पीवी पैनल
         नैरोगेज कोच पर सौर पीवी पैनल


         नैरोगेज कोच पर सौर पीवी पैनल
         नैरोगेज कोच पर सौर पीवी पैनल


         नैरोगेज कोच पर सौर पीवी पैनल
         नैरोगेज कोच पर सौर पीवी पैनल


         नैरोगेज कोच पर सौर पीवी पैनल
         नैरोगेज कोच में एलईडी लाइट


  • नैरोगेज कोच पर लगाए गए सौर पीवी पैनल का विवरण:

    • रेलवे ने कांगड़ा घाटी में पठानकोट-जोगिंदर नगर मार्ग पर चलाए जा रहे चार नैरोगेज कोचों की छत पर ट्रेन लाइटिंग सिस्टम के लिए सौर पैनल लगाए गए हैं और 14 नैरो गेज कोच कालका-शिमला मार्ग पर ट्रायल आधार पर चलाए जा रहे हैं।

      क्रमांक सोलर मॉडीफाइड नैरोगेज कोच कालका शिमला खंड (अंबाला मंडल) 24 वोल्ट पठानकोट-जोगिंदरनगर खंड(फिरोजपुर मंडल) 24 वोल्ट पठानकोट-जोगिंदरनगर खंड(फिरोजपुर मंडल) 110 वोल्ट
      1नैरोगेज कोचों की होल्डिंग 86 Nos.82 Nos.
      2छत पर सौर पैनल लगाकर मॉडीफाई किए गए कोचों की सं./td> 14 Nos.03 Nos. 01 No.
      3मॉडिफिकेशन की तिथि नवं, 2012जून, 2011 जुलाई, 2011
      4सौर मॉड्यूल की रेटिंग 2x100वाटशक्ति16x80 वाटशक्ति 18x80 वाटशक्ति
      5प्रयोग की गई बैट्री 24 V / 210 AH एक सेट ( 2.2V x12 nos) 24 V / 210 AH एक सेट ( 2.2V x12 nos) 12 V / 70AH दो सेट (12V x9 nos)
      6इन्वर्टर सह चार्ज कंट्रोलर की रेटिंग 10 A40A 30A
      7क्या आल्टरनेटर हटा लिया गया? हांनहीं ( डिस्कनेक्टेड) हां
      8पुरानी बैट्री की क्षमता 12x2 वोल्ट 24V,210 एम्पियर आवर24V,210 एम्पियर आवर 24V,210 एम्पियर आवर
      9प्रति कोच में लगी लाइटों का लोड 42 वाट(7x6w एलईडी)140 वाट (7x20w एफटीएल) 72 वाट (9 x8w एलईडी)
      10प्रति कोच में लगे पंखों का लोड कोई नहीं384 वाट (12 x32w) 240 वाट (10 x24w)
      11प्रति कोच में लगे लैपटाप चार्जिंग का लोड कोई नहींकोई नहीं 120 वाट (2 x60w)
      12कुल लोड 42 वाट524 वाट 432 वाट
      13बैट्री बैंक(अतिरिक्त) 2 x12 वोल्ट एसएमएफ बैट्री कोई नहीं कोई नहीं
      II2014 में किए गए मॉडीफिकेशन
      1कोचों की सं. जिनकी छत पर सौर पैनल लगा कर मॉडीफाइ किया गया 01 Nos.- -
      2मॉडीफिकेशन की तिथि Nov, 2014- -
      3सोलर मॉड्यूल की रेटिंग 8x35Wp- -
      4बैट्री बैंक - -
      5इन्वर्टर सह चार्ज कंट्रोलर की रेटिंग 20 A- -
      6क्या आल्टरनेटर हटा लिया गया?(3.0 किलोवाट) Yes- -
      क्रमांकपैरामीटर कांगड़ घाटी सेक्शन,फिरोजपुर कालका-शिमला सेक्शन, अंबाला
      1नैरोगेज कोचों की होल्डिंग 82 86
      2कोचों की सं. जिनकी छत पर सौर पीवी यूनिट लगाए गए 3 1 14 1
      3लगाए जाने की तिथि जून, 2011 से जुलाई, 2011से नवंबर, 2012 से अगस्त, 2014
      4सौर मॉड्यूल की रेटिंग 16 x 80Wp 18 x 80Wp 2 x 100Wp 8 x 35Wp
      5प्रयोग की गई बैट्री 24V, 210Ah 110V, 70Ah 24V, 210Ah 24V, 210Ah
      6चार्ज कंट्रोलर की रेटिंग 40A 30A 10A 20A
      7सौर पैनलों की सं. 16 18 2 8
      8प्रत्येक सौर पैनल की रेटिंग 80Wp 80Wp 100Wp 35Wp
      9कोच लदान (ग्रीष्म) 524W 432W 42W 42W
      10कोच लदान (शीत) 140W 192W 42W 42W
      11सिस्टम की अनुमानित लागत 2.5 लाख 2.5 लाख 2.5 लाख 2.5 लाख
      12सौर पैनलों का मेक टाटा बीपी सोलर टाटा बीपी सोलर सुराना वेंचर्स लिमिटेड सीईएल
      13औसत पावर जेनरेशन(ग्रीष्म) 12.45 kWh/Day 12.45 kWh/Day 0.8 kWh/Day 1.13 kWh/Day
      14औसत पावर जेनरेशन(शीत काल) 9.94 kWh/Day 9.94 kWh/Day 0.6 kWh/Day 0.83 kWh/Day
      15पाई गई कमियां - -
      • बैट्री पूरी तरह चार्ज नहीं हो रही है।
      • कुछ पैनलों की ऊपरी सतह खस्ताहाल है।
      • 4 कोचों में सोलर मॉड्यूल पर पत्थर से प्रहार के मामले
      -
      16टिप्पणी किसी वाह्य चार्जिंग की आवश्यकता के बिना बैट्री की प्रभावी चार्जिंग
      1. बैट्री चार्जिंग का 50-60%
      2. दोनों तरफ अर्थात् कालका और शिमला पर बाहरी चार्डिंग अपेक्षित है।
      1. बैट्री चार्जिंग का 90% सामान्यतया कोई बाहरी चार्जिंग अपेक्षित नहीं है हालांकि बदली वाले मौसम में बाहरी चार्जिंग की आवश्यकता होती है।
         ब्रॉडगेज गैर-वातानुकूलित कोचों पर सौर पैनल
         ब्रॉडगेज रेलवे कोच पर सौर पैनल


      ब्रॉडगेज जीएस कोच ट्रायल आधार पर ट्रेन लाइटिंग के लिए छत पर सौर पैनल के साथ लगाए गए हैं।

      रेलवे ने दो दिन चलने वाली इंटरसिटी गाड़ियों के जीएस कोचों तथा सभी मौसमी स्थितियों में एक वर्ष के संवर्धित ट्रायल के लिए कांगड़ा घाटी में पठानकोट-जोगिंदर नगर मार्ग और कालका-शिमला मार्ग पर चलाए जा रहे 50% नैरोगेज कोच की छतों पर सौर पैनल लगाने का निश्चय किया है।

      वर्तमान में रेल कोचों में विद्युत पावर की व्यवस्था य़ा तो सेल्फ जेनरेटिंग टाइप है अथवा एंड ऑन जेनरेशन टाइप है जिसमें जीवाश्म ईंधन की खपत होती है और नीचे लटकने वाले जो जेनरेटिंग उपकरण फिट किए गए हैं उन को ज्यादा मेंटेनेंस की आवश्यकता होती है। दिल्ली मंडल ने एक ब्रॉड गेज गैर-वातानुकूलित कोच जीएस20022 में लाइट और पंखों के लिए विद्युत पावर की आवश्यकता पूर्ति के लिए पहली बार सौर पीवी सिस्टम लगाएं हैं। सौर पीवी लगाने ले कार्बन फुटप्रिंट में कमी आएगी और मौजूदा जेनरेटिंग उपकरणों की तुलना में कम मेंटेनेंस की आवश्यकता होगी। सौर पीवी वाले कोच पिछले 5 महीने से सफलतापूर्वक चलाए जा रहे हैं और इनका परफॉर्मेंस संतोषजनक पाया गया।

  • साइंस एक्सप्रेस में सौर शक्ति:

    • इंस एक्सप्रेस भारत की अपनी तरह की पहली ट्रेन है ,जिसकी छतों पर स्वदेशी सौर पीवी मॉड्यूल लगे हुए हैं। यह गाड़ी मेक इन इंडिया के साथ-साथ भारत सरकार की स्वच्छ भारत-हरित भारत विचारधारा का प्रदर्शन मात्र है।


         साइंस एक्सप्रेस की छत पर लगे सौर पैनल

      भारतीय रेल हरित ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए वचनबद्ध है और इस प्रक्रिया में प्रायोगिक आधार पर गैर-वातानुकूलित ब्रॉडगेज कोचों मे से एक की छत पर परंपरागत सौर पैनल भी लगाया गया है। इस कोच में यह दर्शाया गया है कि दिन के समय सौर शक्ति से और रात्रि के समय आंशिक तौर पर बैट्रियों में स्टोर की गई अतिरिक्त सौर ऊर्जा से भी गैर-वातानुकूलित कोच की ऊर्जा संबंधी लगभग सभी आवश्यकताओं की पूर्ति संभव है। प्रदर्शन एवं इस क्षेत्र में विभिन्न संभावनाओं पर आगे कार्य करने के लिए साइंस एक्सप्रेस को लक्ष्य बनाया गया है। विज्ञान के आकांक्षी उम्मीदवारों के लिए यह मोबाइल शैक्षिक संस्थान के रूप में कार्य करेगा। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, गहन जानकारियो तथा विज्ञान और तकनीकी के यथासंभव हर पहलू की जानकारी इसमें उपलब्ध है। अपनी सौर कुशलताओं का प्रयोग करके सीईएल ने साइंस एक्सप्रेस में तीन वातानुकूलित कोचों पर सौर पैनल लगाएं हैं। इस ट्रेन के एक कोच की छत पर स्वदेशी लचीले पीवी मॉड्यूल का इस्तेमाल भी रिकॉर्ड समय में किया गया है।

         सांइस एक्सप्रेस की छत पर सौर पैनल
         सांइस एक्सप्रेस की छत पर सौर पैनल


      साइंस एक्सप्रेस में एडहेसिव का प्रयोग करके मॉड्यूल को कोच की छतों पर माउंट किया गया है। अधिक मजबूत बंधन के लिए जो एडहेसिव प्रयोग किया गया है वह पोलीयूरेथीन एडहेसिव सीलेंट 560 है जो रिवेट और यांत्रिक बंधनों का स्थान ले सकता है। यह लंबे समय तक पराबैंगनी किरणों को सह सकता है। इसके अतिरिक्त,दोहरी सुरक्षा के लिए “ 3एम एक्सट्रीम सीलिंग“ टेप का भी प्रयोग किया जाता है। यह टेप अपघर्षण प्रतिरोधी है और इसमें अत्युत्तम एडहेसिव गुण हैं।

      इसमें, प्रत्येक कोच में अलग अलग तकनीकी का प्रयोग किया गया है। इन तकनीकियों से 80% तक भार में कमी आई है। ये सभी लचीले(फ्लेक्सिबिल) सौर पैनल हैं। इस प्रक्रिया में सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड(सीईएल), विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय का एक सार्वजनिक उपक्रम औरों की तुलना में काफी आगे है और “मेक इन इंडिया” पहल के अंतर्गत सीईएल द्वारा साइंस एक्सप्रेस में प्रयोग हेतु लचीले सौर फोटोवोल्टोइक मॉड्यूल विशेष रूप से डिज़ाइन किए और बनाए हैं। प्रत्येक तीन में से एक कोच में भारत में बने लचीले सौर पैनल लगाए गए हैं। यह पहली बार है कि लचीले पीवी मॉड्यूल अपने देश में ही बनाए गए हैं। अनुमानतः 3 केवीए शक्ति का सौर फोटोवोल्टेइक पावर प्लांट कोच की छत पर लगाया गया है। इनके द्वारा यूटिलिटी ग्रिड का प्रयोग करने वाले इन्वर्टर को विद्युत आपूर्ति की जाती है। इन्वर्टर की आउटपुट पावर को एलटी साइड(415 वोल्ट, 3 फेज़) के समतुल्य कर दिया जाता है। ये प्लांट स्वतः चालित हैं और माइक्रोप्रोसेसर-आधारित कंट्रोल सिस्टम द्वारा नियंत्रित होते है।



         सांइस एक्सप्रेस की छत पर सौर पैनल
         सांइस एक्सप्रेस की खिड़की में सौर पैनल


      किसी भी प्लांट की विश्वसनीयता अधिकांशतः, इन्वर्टर की कन्फिगरेशन और प्रकार्यात्मकता, ग्रिड के साथ इन्वर्टर के इंटरफेस, जिस तरीके से इन्वर्टर अलग-अलग स्थितियों का पता लगाता है और ग्रिड विफलता की स्थिति में ग्रिड से अलग करने के लिए की गई सुधारात्मक कार्रवाई पर निर्भर होती है। पावर कंडीशनिंग यूनिट/इन्वर्टर विशेष ग्रिड को एसी पावर प्रदान करता है जिसका उद्देश्य है परंपरागत पावर पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करना(जैसे-डीज़ल). पावर कंडीशनिंग यूनिट मुख्यतः एमपीपीटी और इन्वर्टर से बनता है। उच्च क्षमता युक्त इन्वर्टर, पावर संरक्षण के लिए आईजीबीटी डिवाइस लगाकर सरणि में मौजूद डीसी पावर को एसी में कन्वर्ट करता है। माइक्रोप्रोसेसर द्वारा नियंत्रित इन्वर्टर एमपीपीटी तकनीक को तथा सभी अपेक्षित सुविधा फीचर्स को समाविष्ट करता है।

      संरक्षा के सभी उपायों पर भी विचार कर लिया गया है। छत के सभी तारों को लंबी अवधि तक चलने वाले टेप से आवृत्त कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त इन तारों को कोचों के अंदर लचीली ट्यूब के अंदर डाला गया है। विभिन्न चरणों पर पृथक्करण (isolation) के विभिन्न स्तरों को प्रदान किया गया है। जंक्शन बॉक्स के अंदर फ्यूज़ कट ऑफ लगाए गए हैं और एमसीबी एसी आउटपुट के डोरस्टेप के ठीक बाहर और आरएमपीयू के एलटी पैनल के पास लगाया गया है।


  • भविष्य की योजना:

      • हरित ऊर्जा संसाधनों के उपस्करण के लिए की गई नीतिपरक पहल और हस्तक्षेप तथा ऊर्जा संरक्षण उपायों को क्रियान्वयन से लाभकारी परिणाम प्राप्त हुए हैं।

      पहित ऊर्जा पहल का हिस्सा होने के नाते भारतीय रेल नवीन और अक्षत ऊर्जा मंत्रालय के आर्थिक सहयोग से 200 स्टेशनों, 21 प्रशासनिक भवनों और 2000 समपार फाटकों पर लगभग 7 मेगावाट के ग्रिड कनेक्टेड सौर शक्ति यंत्र लगाए जाने पर विचार कर रहा है। भारतीय रेल पीपीपी मोड के माध्यम से रेलवे स्टेशनों और रेल भवनों की छतों पर उपलब्ध स्थान पर तथा रेल भूमि के उपयोग के लिए सौर ऊर्जा उपस्कर लगाने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है। क्षेत्रीय रेलों ने एमएनआरई से वीजीएफ के साथ रेलभवनों की छत पर 50 मेगावाट शक्ति प्रदान करने के लिए इसे आईडेंटिफाई कर लिया है।

      एमएनआरआई ने रेलवे के प्रमुख भवनों में छत के ऊपर 500 मेगावाट शक्ति क्षमता के ग्रिड कनेक्टेड सौर ऊर्जा प्लांट लगाए जाने वाले प्रोजेक्ट के लिए, केंद्रीय वित्तीय सहायता सहित (सीएफए) जिसकी अनुमानित लागत 540 करोड़ रू.है( प्रति मेगावाट शक्ति 8.0 करोड़ रू. की निर्धारित लागत का 15% अर्थात् 1.20 करोड़ प्रति मेगावाट शक्ति,इसे संशोधित किया जा सकता है) ,की सैद्धांतिक रूप से अनुमति दे दी है। एमएनआरई,एसईसीआई आदि से सहयोग लेने के लिए एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर किया गया है।

      श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु , रेल मंत्री और श्री पीयूष गोयल, राज्यमंत्री/स्वतंत्र प्रभार/ऊर्जा,कोयला और नवीन तथा अक्षत ऊर्जा की उपस्थिति में दिनांक 12.8.2015 को रेलवे के एनर्जी मिक्स और सौरकरण (energy mix & Solarization) परिवर्तन लाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग के लिए रेल मंत्रालय और नवीन और अक्षत ऊर्जा मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए । (समझौता ज्ञापन रेल मंत्रालय और नवीन और अक्षत ऊर्जा मंत्रालय के बीच श्री तरूण कपूर, संयुक्त सचिव/एमएनआरई और श्री सुधीर गर्ग/कार्यकारी निदेशक/ ईईएम/रेलवे बोर्ड की उपस्थिति में किए गए).

      समझौता ज्ञापन की प्रमुख बातें:
      • इस ज्ञापन में शामिल मुद्दों पर जब आवश्यक हो और उचित समझा जाए तो एमएनआरई और रेल मंत्रालय एक दूसरे से संपर्क करेंगे और यह सुनिश्चित करने के लिए कि और दोनों संगठनों के कर्मचारी एक दूसरे को सद्भावपूर्वक सहयोग करते रहे, इसका भरसक प्रयास करेंगे।
      • दोनों पार्टियां प्रोजेक्ट संबंधी मामलों से एक दूसरे को अवगत/जानकारी देती रहेंगी। यदि एमएनआरई और रेल मंत्रालय के बीच कोई झगड़ा या विवाद होता है तो वे दोनों ही विवाद को शीघ्र और सद्भावपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश करेंगे।
      • रेल मंत्रालय और एमएनआरई आवश्यकतानुसार प्रोजेक्ट के शीघ्रता से पूरा किए जाने और कमीशनिंग सुनिश्चित करने के लिए जेवी/जेवीसी को अपेक्षित विधिक सहायता उपलब्ध कराएंगे
      • एसईसीआई, एमएनआरई का एक सार्वजनिक उपक्रम, रेल मंत्रालय या उसकी एजेंसियों के साथ संयुक्त रूप से प्रोजेक्ट से पहले की जाने वाली गतिविधियों जैसे सर्वेक्षण, प्रोजेक्ट की लागत प्रमाणित करने के लिए व्यवहार्यता/बैंक एबिलिटी रिपोर्ट तैयार करना, भूमि की आवश्यकता, प्रोजेक्ट संबंधी अन्य आवश्यकताएं और प्रोजेक्ट की व्यवहारिकता आदि पूरी करेंगे जिसमें रेल मंत्रालय द्वारा अपेक्षित स्थान का निर्धारण शामिल है। वर्तमान योजना के अंतर्गत यदि इसकी अनुमति दी जाती है तो एमएनआरई/एसईसीआई इस लागत को पूरा कर सकते हैं । यदि नहीं मिलती तो इस लागत को रेल मंत्रालय द्वारा पूरा किया जाएगा
      • एमएनआरई और इसके सार्वजनिक उपक्रम, रेल मंत्रालय और इसके सार्वजनिक उपक्रमों से परामर्श करके एसपीवी/जेवीसी बनाने के लिए यथा संभव रेल मंत्रालय की अपेक्षानुसार आवश्यक कदम उठाएंगे। जेवी/जेवीसी निर्माण का व्यय जेवी एग्रीमेंट के अनुसार परस्पर सहमति से वहन किया जाएगा।
      • एमएनआरई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की फंडिंग के लिए बहुपक्षीय निकायों से निधि की व्यवस्था रेल मंत्रालय के लिए सुगम बनाएगा और जब भी उपलब्ध हो केंद्रीय वित्तीय सहायता भी देगा।


  • एमएनआरई से केंद्रीय वित्तीय सहायता द्वारा क्षेत्रीय रेलों की छत के स्थान पर 50 मेगावाट पावर के सौर ऊर्जा उपस्करण लगाना:

    • चूंकि छत पर सौर पावर यूनिट लगाए जाने के लिए रेल भवनों के छत के स्थान का उपयोग किया जाना है इसलिए टेरिफ(सीमा शुल्क) आधारित खुली निविदा बुला कर इस पूरे प्रोजेक्ट को क्षेत्रीय रेलों द्वारा क्रियान्वित किया जाना चाहिए।

      ग्रिड कनेक्टेड छत के लिए व्यवसायिक मॉडलों पर एमएनआरई दिशा निर्देशों के प्रावधान के अनुसार ( 30/11/2012-13 दिनांक 26.06.2014 का पैरा 7.0(बी) (i)) कैप्टिव जेनरेटेड प्लांट के लिए थर्ड पार्टी द्वारा सौर यंत्र लगाना, उसका संचालन एवं अनुरक्षण(ओ एंड एम), थर्ड पार्टी द्वारा ग्राहक की छत पर सुविधा प्रदान करना और ग्राहक उसे शेयर के रूप में इन्वेस्ट नहीं कर सकता और थर्ड पार्टी सुविधा के अंडरटेकिंग और मेंटेनेंस की व्यवस्था भी करेगी और पावर छत के मालिक को बेच दी जाएगी।

      रेलवे ने काफी बड़े क्षेत्र का उल्लेख किया है हालांकि, क्षमता को देखते हुए उनके द्वारा उल्लिखित क्षेत्रों पर निर्भर रहते हुए 1 मेगावाट से 5 मेगावाट तक की रेलवे रेंज के बीच उसका वितरण किया जा चुका है। रेलवे को प्रोजेक्ट के मानदंड का लाभ लेने के लिए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अधिमानतः प्रत्येक प्रोजेक्ट1 मेगावाट शक्ति का हो लेकिन 500 किलोवाट शक्ति से कम न हो। एक प्रोजेक्ट में एक से अधिक साइट/लोकेशन क्लब किए जा सकते हैं,हालांकि, किसी भी एक लोकेशन की क्षमता 50 किलोवाटशक्ति से कम नहीं होनी चाहिए।

      क्षेत्रीय रेलों पर उपलब्ध छत का स्थान
      रेलवे छत पर उपलब्ध स्थान (वर्ग मी. में)
      मरे84768
      पूरे144281.51
      पूमरे 68777
      पूतरे37074
      उरे349853
      पूरे132261.8
      पूसीरे54966.02
      उमरे114159
      उपरे57277
      दरे109892.12
      दमरे196105
      दपूरे64793
      दपूमरे25939
      दपरे33500
      परे428852
      पमरे22108
      सीएलडब्ल्यू19300
      डीएलएमडब्ल्यू/पटियाला45000
      डीएलडब्ल्यू41205
      आईसीएफ252004
      आरसीएफ13150
      आरडब्ल्यूएफ12900
      मेट्रो कोलकाता17035
      आरडीएसओ32498
      रेल वि./इलाहाबाद6773
      कुल योग1934383.14
      1. ये परियोजनाएं क्षेत्रीय रेलों द्वारा टेरिफ आधारित खुली निविदा पर क्रियान्वित की जानी हैं जहां रेलवे रेल भवनों/रेलवे स्टेशनों/स्टेशन प्लेटफॉर्म शेड/वर्कशॉप शेड की छत अथवा सौर यूनिट के लिए कोई और उपयुक्त छत का स्थान उपलब्ध कराएगी और डिवेलपर सौर यूनिट को रखने के लिए धन लगाएगा। प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन पर डिवेलपर निर्धारित कीमत का 15% अथवा नवीन एवं अक्षत ऊर्जा मंत्रालय की प्रोजेक्ट लागत, जो भी कम हो( निर्धारित लागत के अनुसार आर्थिक सहायता 1.2 करोड़ अर्थात् एक समन्वयक रेलवे द्वारा 8.0 करोड़ रू0/मेगावाट शक्ति के अनुसार प्रोजेक्ट लेने की कीमत होगी) क्लेम करेगा।
      2. क्षेत्रीय रेल डिवेलपर के साथ 25 वर्षों के लिए पावर पर्चेज़ एग्रीमेंट(पीपीए) पर न्यूनतम प्रति यूनिट पावर लागत का प्रस्ताव देते हुए हस्ताक्षर करेगी जो कि खुली निविदा प्रक्रिया द्वारा अगले 25 वर्षों के लिए निर्धारित रहेगी। डिवेलपर पूरे सिस्टम के अनुरक्षण के लिए उत्तरदायी होगा. वीजीएफ प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए पूरे सिस्टम की लागत का भी डिवेलपर द्वारा उल्लेख किया जाएगा।
      3. क्षेत्रीय रेलों को 1 मेगावाट शक्ति से 5 मेगावाट तक की अलग-अलग क्षमता आबंटित की गई है जैसा कि नीचे दी गई सारणी में दर्शाया गया है।
      4. क्रमांक रेलवे मेगावाट शक्ति में आबंटित सौर प्लांट क्षमता आर्थिक सहायता संवितरण हेतु रेलवे का समन्वय
        1 NR 5 NR
        2 NCR 1
        3 NER 2
        4 NWR 1
        5 DLW 2
        6 RCF 2
        7 DLMW/PTA 2
        SUB TOTAL 14
        8 SCR 4 CR
        9 CR 4
        10 WCR 3
        11 SECR 1
        12 WR 4
        SUB TOTAL 16
        13 SR 4 SR
        14 SWR 1
        15 RWF 2
        16 ICF 2
        SUB TOTAL 9
        17 SER 2 SER
        18 ER 2
        19 NFR 2
        20 ECR 1
        21 CLW 1
        22 Dankuni W/S 2
        SUB TOTAL 11
        TOTAL 50
      5. हालांकि, सस्ती पावर टेरिफ लेने के लिए, यह आवश्यक है कि प्रत्येक प्रोजेक्ट की क्षमता पर्याप्त होनी चाहिए। इस लिहाज से प्रत्येक प्रोजेक्ट की क्षमता सामान्यतया 1 मेगावाट शक्ति होनी चाहिए, ये 500 किलोवाट शक्ति से कम नहीं होना चाहिए। एक से अधिक साइट वाले प्रत्येक प्रोजेक्ट को स्थिति के अनुसार 1 मेगावाट शक्ति/500 किलोवाट शक्ति की क्षमता को संयुक्त करने के लिए एकसाथ क्लब कर दिया जाना चाहिए। तथापि, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि 1 मेगावाट शक्ति/500 किलोवाट शक्ति वाले प्रोजेक्ट में कोई इंस्टालेशन 50 किलोवाट शक्ति से कम नहीं होना चाहिए।
      6. संपूर्ण पावर रेलवे द्वारा क्रय की जाएगी और क्षेत्रीय रेलों द्वारा डिवेलपर के साथ न्यूनतम दर का प्रस्ताव देते हुए प्रति यूनिट पावर की निर्धारित लागत जो कि खुली निविदा प्रक्रिया में बताया गया है, 25 वर्षों की लंबी अवधि के लिए पावर पर्चेज़ एग्रीमेंट(पीपीए) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
  • क्षेत्रीय रेलों द्वारा पहल:

    • उत्तर पश्चिम रेलवे


      अजमेर रेलवे स्टेशन पर 4x10 किलोवाट शक्ति का सौर पीवी प्लांट (उपरे) (सामूहिक सामाजिक उत्तरदायित्व, कॉनकोर)




      उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल और कॉनकोर के बीच (i) रेवाड़ी रेलवे स्टेशन पर 50 केवी शक्ति के ग्रिड से जुड़े सौर शक्ति प्लांट लगाने के लिए (ii) सीएसआर प्रोजेक्ट के अंतर्गत रेवाड़ी रेलवे स्टेशन पर 50 केवी शक्ति के ग्रिड से जुड़े सौर शक्ति प्लांट लगाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। ये कार्य सीईएल द्वारा किया जाएगा जिसके लिए निधि कॉनकोर द्वारा दी जाएगी । सीईएल परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे से अपेक्षित सहायता हेतु प्रबंध भी करेगा और व्यवस्था भी करेगा।