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भारतीय रेलवे की हरित ऊर्जा पहल

चूंकि भारत में हवा की संभावनाएं वृहद स्तर पर विद्यमान हैं, इसलिए भारतीय रेल पर हरित और शुद्ध ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए प्रचुर वायु वाले क्षेत्रों जैसे- राजस्थान,गुजरात,महाराष्ट्र,आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पवन चक्की प्लांट स्थापित करने की पहल आरंभ की जानी है, जिसके लिए नीतिगत दिशानिर्देश विद्यमान हैं।

अब तक की प्रगति:

हरित भविष्य की ओर एक लंबी छलांग

भारतीय रेल की हरित ऊर्जा परियोजना एक तरफ पर्यावरण प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग मुद्दे पर बढ़ती चिंता के प्रति जागरूकता के लिए अति महत्वपूर्ण है तो दूसरी तरफ जीवाश्म ईंधन की कमी और ऊर्जा की मांग में कमी को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित स्लोगन “गो-ग्रीन“अनुबंध के पूर्णतया अनुरूप है।

भारतीय रेल पर 10.5 मेगावाट की क्षमता वाला सबसे पहला पवन चक्की प्रोजेक्ट 30.03.2009 में इंटीग्रल कोच कारखाना, चेन्नई की ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु तमिलनाडु के त्रिनुवेली जिले में लगाया गया। इन पवन टर्बाइनों ने अब तक 100 मिलियन यूनिट जेनरेट की हैं। यह प्रोजेक्ट जलवायु परिवर्तन पर यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क्स कन्वेंशनके साथ पंजीकृत भी किया गया है, जो कि प्रतिवर्ष 20000 सीईआर का कार्बन क्रेडिट अर्न करेगा।

भारतीय रेल और भारत सरकार के किसी अन्य संगठन का यह अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है। भारतीय रेल की हरित ऊर्जा परियोजना एक तरफ तो पर्यावरण प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग मुद्दे पर बढ़ती चिंता के मद्देनज़र तथा दूसरी तरफ जीवाश्म ईंधन की कमी एवं ऊर्जा की मांग में कमी को देखते हुए बहुत महत्वपूर्ण है और इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित स्लोगन “गो-ग्रीन“अनुबंध के पूर्णतया अनुरूप है।

परियोजना के उद्देश्य

  • निरंतर विकास के लिए हरित ऊर्जा दोहन(काम में लाना).
  • कैप्टिव खपत के लिए बिजली प्रयोग की जाएगी।
  • आईसीएफ की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए 23 मिलियन यूनिट प्रतिवर्ष पवन चक्की कार्यक्षमता पर्याप्त है। पवन बिजली प्लांट से 23.1 मिलियन यूनिट प्रतिवर्ष जेनरेट करने का प्रस्ताव है।
  • हरित ऊर्जा होने के कारण यह कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा, जिससे ग्लोबल वार्मिंग इत्यादि में कमी आएगी।

भारतीय रेल के अंतर्गत पवन ऊर्जा परियोजना

पवन चक्की

पवन चक्की से उत्पन्न ऊर्जा को कैप्टिव खपत के लिए प्रयोग किया जाता है। पवन चक्की से अनुमानित वार्षिक उत्पादन 25.9 मिलियन यूनिट (28% पीएलएफ) है और इससे आईसीएफ की ऊर्जा मांग को पूरा किया जा सकेगा।पवन चक्की से जेनरेट की गई अतिरिक्त ऊर्जा टीएनईबी को बेच दी जाएगी। परियोजना सीडीएम लाभ हेतु बिल्कुल सही है और कार्बन क्रेडिट से 2.0 करोड़ का वार्षिक राजस्व अनुमानित है। हरित ऊर्जा के प्रति निरंतर विकास के पहलू को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना संगठित उत्तरदायित्व के रूप में कार्य कर रही है। हरित ऊर्जा होने के कारण यह कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा जिससे ग्लोबल वार्मिंग इत्यादि जैसे दुष्प्रभावों से भी बचा जा सकेगा। दैनिक उत्पादन रिपोर्ट आईसीएफ रेलनेट वेबसाइट (विद्युत विभाग लिंक) पर उपलब्ध है।

भविष्य की योजना

भारतीय रेल ने 168 मेगावाट क्षमता वाले अतिरिक्त पवन चक्की प्लांट स्थापित करने की भी योजना बनाई है। इनमें से 10.5 मेगावाट रेलवे की अपनी निधियों से स्थापित किया जाएगा जबकि 157.5 मेगावाट की योजना वित्त के अन्य वैकल्पिक माध्यमों द्वारा की गई है। इनमें से राजस्थान में 25 मेगावाट क्षमता वाले पवनचक्की का ठेका रेलवे ऊर्जा प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (REMCL)को दिया गया है जिसे दिसंबर-2015 तक स्थापित करने का लक्ष्य है। शेष क्षमता के लिए, किन-किन राज्यों के पास पर्याप्त पवन गति और समुचित पावर इवैक्यूएशन की व्यवस्था है, इसपर कार्य चल रहा है। जनवरी-2015 में कुछ हिस्से के लिए बोलियाँ आमंत्रित की जाएंगी।

राजस्थान में 25 मेगावाट(±1) पवन चक्की का विवरण

प्रमुख विशेषताएं:

  • रेलवे बोर्ड का आदेश : दिनांक 24.01.2014 का पत्र # 2010/Elect(G)/150/7
  • योजना शीर्ष ‘36’ के अंतर्गत उत्तर पश्चिम रेलवे की पिंक बुक 2014-15 का मद सं.
  • कार्य सौंपने की तिथि: 21.11.2014
  • करार पर हस्ताक्षर की तिथि: 18.12.2014
  • एजेंसी का नाम : मेसर्स आईएनओएक्स विंड लिमिटेड
परियोजना की लागत और अन्य मापदंड:
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आईडीसी आदि सहित परियोजना की पूंजीगत लागत.: रू0 160 करोड़ (अनुमानित)
उधार/ऋण 80% की दर से (आईडीसी के बीच): रू0 128 करोड़
इक्विटी 20% की दर से: Rs 32 Crs

लोकेशन :

ग्राम - डांगरी, जिला - जैसलमेर (राजस्थान)

पवनचक्की के फीचर्स :

1. डब्ल्यूटीजी की रेटिंग : 2 मेगावाट
2. डब्ल्यूटीजी की सं.: 13
3. डब्ल्यूटीजी हब की ऊंचाई : 80 मीटर 4. रोटर व्यास/मोटाई : 93.3मीटर
5. कैपिटल यूटिलाइजेशन फैक्टर (सीयूएफ): 22%
6. प्रति यूनिट पूर्वानुमानित (Kwh) समान किराया : Rs. 6.59
7. वार्षिक पावर जेनरेशन : 48 एमयू
8. पश्चिम मध्य रेलवे को पावर कनेक्टिविटी : 3 Nos. टीएसएस
9. टीएसएस की लोकेशन : भरतपुर, हिंडन सिटी और रामगंज मंडी

प्लांट चालू करना

  • कार्य पूरा कर लिया गया है।
  • डीआईएससीओएम (DISCOM) और टीआरएएनएससीओ (TRANSCO) के साथ व्हीलिंग और बैंकिंग अनुबंध (WBA) तथा व्हीलिंग अनुबंध(WA) साइन किया गया है।
  • पवन ऊर्जा प्लांट स्थापित करने संबंधी अन्य औपचारिकताएं जैसे- टीआरएएनएससीओ (TRANSCO) से इंटरकनेक्शन अनुमोदन और जोधपुर डीआईएससीओएम (DISCOM) आदि से मीटरिंग अनुमोदन पूरा कर लिया गया है और स्टेब्लाइजेशन के लिए ट्रायल चल रहा है।


क्षेत्रीय रेलों द्वारा पहल


दिनांक 20 नवंबर-2015 को पश्चिम रेलवे, “पवन ऊर्जा-रेल सेक्टर में सुअवसर” विषय पर मुंबई में एक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित कर रहा है। सरकारी संस्थाओं के प्रमुख वक्ता, उद्योग प्रमुख, वित्तीय संस्थान, शोध संस्थान, प्रोजेक्ट इंटीग्रेटर, ऊर्जा अर्थशास्त्री,अक्षत ऊर्जा पर कार्य कर रहे विशेषज्ञ उपरोक्त सेमिनार के प्रमुख वक्ता होंगे ।

सेमिनार के लक्ष्य हैं:

• पवन ऊर्जा, भविष्य में निरंतरता की कुंजी
• रेल सेक्टर में पवन ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर अंतर्राष्ट्रीय,राष्ट्रीय,उद्योगपतियों, शोध संस्थानों से सीखें और उनके अनुभव साझा करें.
• रेल सेक्टर में पवन ऊर्जा के सफल क्रियान्वयन हेतु नई तकनीकियां-एक अभिनव विकल्प
• चर्चा करें, समझें और रेल सेक्टर में पवन ऊर्जा पर विकास के अवसर ढूढ़ें।